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World Environment Day 2018 – Dhamtari

Brahma Kumaris

विकास निःसंदेह आवश्यक है, लेकिन स्वास्थ्य से बढ़कर नहीं है – ब्र.कु. अखिलेश

धमतरी। ब्रह्माकुमारीज़ दिव्यधाम धमतरी के तत्वाधान में 05 जून ‘विश्व पर्यावरण दिवस‘ के अवसर पर पकृति, पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन हेतु संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसका विषय था ‘मन को स्वच्छ और धरती को हरा भरा करें‘। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री शक्ति वर्मा, कीट वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र धमतरी, श्री नितिन पाण्डेय, सहायक अभियंता महानदी जलाशय परियोजना बांध मंण्डल रूद्री, मुख्य वक्ता के रूप में ब्रह्माकुमारी अखिलेश बहन सेवाकेन्द्र इंचार्ज मगरलोड एवं दिव्य उद्बोधन ब्रह्माकुमारी सरिता बहन, संचालिका ब्रह्माकुमारीज़ जिला धमतरी रहे।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी अखिलेश बहन ने कहा कि प्रकृति के बिना मानव जीवन की कल्पना करना संभव नहीं है। इसलिए सभी शास़्त्रों में प्रकृति को देवतुल्य माना गया है। अथर्व वेद में पेड़ को नारी की संज्ञा दी गई है एवं उसकी पीड़ा का वर्णन किया गया है। प्रकृति और मानव एक दूसरे के पूरक है। मनुष्य का जीवन संतुलित हो तो शरीर स्वस्थ होता है। आज हममें प्रकृति को सुरक्षित रखने की जागरूकता तो आई है इसलिए पौधे भी लगाते हैं लेकिन उन पौधों की संभाल नहीं करते। आधुनिकीकरण और विकास की दौड़ में प्रकृति का अत्यधिक दोहन हो रहा है, विकास निःसंदेह आवश्यक है लेकिन हमारे स्वास्थ्य से बढ़कर नहीं है।
इसी क्रम में शक्ति वर्मा ने कहा कि प्रकृति का दिन-प्रतिदिन ह्रास होते जा रहा है। जहरीले कीटनाशकों एवं खाद से की गई खेती के कारण खेतों की उत्पादन क्षमता घटती जा रही है। अधिकतर कीटनाशक दवाईयों का असर जल्दी खतम नहीं होते और कृषि उत्पाद में बने रहते हैं जिसका सेवन करने से बीमारियां बढ़ती जा रही है। तय मानक से अधिक पेस्टीसाइड अनाज में होना मानव शरीर के लिए हानिकारक है। अमेरिका जैसे देशों में इन मानकों का बहुत ध्यान रखा जाता है लेकिन भारत में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। इस पर्यावरण दिवस मंे हम संकल्प ले कि हम पालीथीन का उपयोग कम करेंगे। अपने घर में किचन कार्डन विकसित करें। सब्जियों को सीधे न खाएं उसे छीलकर या गरम पानी से धोकर पकाएं। इसी तरह नितिन पाण्डेय ने अपने गीतों के माध्यम से पर्यावरण के प्रति अपने संवेदनाएं व्यक्त किये।
इसी प्रकार अपने दिव्य उद्बोधन में ब्रह्माकुमारी सरिता बहन ने कहा कि आज मनुष्य दोष देते हैं कि प्रकृति अपना संतुलन खो चुकी है और कभी कहते हैं कि मनुष्यों का व्यवहार दूषित हो गया है। सच तो यह है कि प्रकृति और पुरूष दोनो ही अपने मूल स्वरूप को खो चुके हैं। आज मनुष्य स्वयं आत्म नियंत्रित नहीं है, संकल्पों का प्रबंधन ठीक नहीं चल पा रहा है, जो स्वयं को भूला हुआ हो वो कर्मेन्द्रियों को कैसे चला सकता है। गायन करते है कि यही प्रकृति पहले सतोप्रधान थी लेकिन आज इतनी दुखदायी हो गई, इसका कारण भी मनुष्य ही है। जैसे ही मनुष्य के अंदर देहभान, लोभ, प्रतियोगिता के कारण औद्योगीकरण हुआ और प्रकृति का स्वरूप बिगड़ गया। मनुष्य के संकल्पों का प्रभाव सीधे प्रकृति पर पड़ता है इसका प्रमाणिक शोध कई वैज्ञानिक कर चुके है।
ब्रह्माकुमारी प्राजक्ता बहन ने कामेन्ट्री के माध्यम से प्रकृति को पवित्र वाइबे्रशन देने का अभ्यास कराया। कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्माकुमारी नवनीता बहन ने प्रकृति वंदना से की। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी जागृति बहन ने किया।