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Shshwat Yogik Kheti Prashikshan Programme

Brahma Kumaris

शाश्वत् जैविक यौगिक कृषि प्रशिक्षण प्रदान किया गया
भारत के कृषि उत्पादो को विश्व बाजार में उचित स्थान और दाम प्राप्त नही हो रहा – राजेश्वरी साहू

धमतरी। ब्रह्माकुमारीज़ दिव्यधाम धमतरी के तत्वाधान में 02 जून को ‘शाश्वत यौगिक खेती‘ का एक

दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम किसान सम्मेलन के रूप में आत्म अनुभूति तपोवन धमतरी में आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री रामू रोहरा जिला अध्यक्ष भाजपा धमतरी, श्रीमती राजेश्वरी साहू, विषय वस्तु विशेषज्ञ कृषि विज्ञान केन्द्र सम्बलपुर, कु. छाया, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ब्रह्माकुमार देवराज मुख्य प्रशिक्षक शाश्वत यौगिक खेती तथा दिव्य उद्बोधन ब्रह्माकुमारी सरिता बहन क्षेत्रीय समन्वयक ग्रामविकास प्रभाग इंदौर जोन रहे।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी सरिता बहन ने कहा कि हमारा शरीर प्रकृति की देन है, वह प्रकृति के पांच तत्वो से ही मिलकर बना है। कृषि हमारी मुख्य आवश्यकताओ को पूरा करता है, जिसके बिना हम जीवन की कल्पना भी नही कर सकते और यदि कृषि ही प्रदूषित हो जाए तो हमारे जीवन की रक्षा कैसे हो सकती है। एक सतोप्रधान मन के द्वारा ही सतोप्रधान अन्न का उत्पादन किया जा सकता है। ज्यादा उत्पादन और धन के लालच में मनुष्य में प्रकृति को दुःख देना शुरू कर दिया तो प्रकृति भी उसे दुःख दे रही है दिन प्रतिदिन नए नए रोग उसे दुःखी और परेशान कर रहे है। यदि हम सुख की चाहना रखते है तो हमे सुख देना सिखना ही होगा। ब्रह्माकुमारीज द्वारा संचालित यौगिक खेती योग द्वारा संकल्पो के माध्यम से प्रकृति को सुख, शांति, पवित्रता के प्रकम्पन देकर पावन बनना और उसी पावन धरती पर पावन अन्न उगाना सिखाता है। जो पूर्णतः रसायनिक खाद एवं जहरीले कीटनाशको से मुक्त होता है। ऐसे यौगिक खेती से उत्पन्न अन्न को ग्रहण करने वाले व्यक्ति के मन भी सशक्त और पावन बनता है। विगत पांच से भी अधिक वर्षो से धमतरी सेवाकेन्द्र के द्वारा किसान रैली, किसान सम्मेलन, संगोष्ठीयों के माध्यम से जिले के किसानो को निरंतर शाश्वत जैविक यौगिक खेती के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। जिसके परिणाम स्परूप आज जिले के कई किसानो ने रसायनिक खाद और कीटनाशको का प्रयोग करना बंद कर पारंपरिक तरिके से योग का प्रयोग कर उत्पादन कर अन्य किसानो के लिए प्रेरणास्रोत्र बन चुके है।
श्री रामू रोहरा जिला अध्यक्ष भाजपा ने कहा कि यह एक बहुत ही सराहनीय कदम है जिसका सीधा सम्बन्ध हमारे स्वास्थ्य से है। सरकार द्वारा रसायन मुक्त कृषि के लिए विभिन्न योजना बनाकर प्रेरित किया जाता है। यदि इस प्रकार के संस्थाओ द्वारा भी आगे आकर इस प्रकार के कार्य करने से किसानो में उमंग उत्साह बढता और वे रूचि के साथ इस कार्य को करते है। पेड पौधे और प्रकृति से हमारी पालना होती है तो हमें भी इनकी सुरक्षा करनी चाहिए।
श्रीमती राजेश्वरी साहू, ने किसानो को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय भारत के कृषि उत्पादो को विश्व बाजार में उचित स्थान और दाम प्राप्त नही हो रहा हैं। हमारे अनाज को कोई भी देश लेने को तैयार नही क्यो कि उनका कहना है कि भारत के अनाजो में जहरीले कीटनाशको का प्रभाव व मात्रा बहुत ज्यादा है जो हमारे देशवासियों के स्वास्थ्य को नुकसान पहूचा सकता इस कारण निर्यात में कमी आई है। हमें डबल नुकसान हो रहा है। स्वास्थ्य और धन दोनो का। आज वैज्ञानिको ने प्रयोगशाला में मानव शरीर के लगभग सभी अंगो को निमार्ण कर चुका है। लेकिन दुनिया के किसी भी प्रयोगशाला में एक इंच मिट्टी का निमार्ण अभी तक नही हुआ। यह धरती एक ही है इसे दुबारा नही बनाया जा सकता इसे केवल सहेजा और संवारा जा सकता है। और इस मिट्टी की हमने रसायन को प्रयोग करके क्या हालत कर दी है। कृषि विज्ञान केन्द्र के द्वारा जैविक खाद बनाने का प्रशिक्षण और अनुदान दोनो दिया जाता है लेकिन इसके लिए हमारे किसान भाईयो को स्वेच्छा से आगे आना होगा।
ब्रह्माकुमार देवराज भाई द्वारा शाश्वत् यौगिक खेती में प्रयोग किए जाने वाले तरिको के बारे में किसानो को बताया कि किस प्रकार गोबर, गौमूत्र, गुड, दही, पेड के पत्तो के माध्यम से हमं घर पर ही जमीन के लिए जीव अमृत, भूमि उपचार, बीज उपचार, तैयार कर सकते है। घर पर ही खाद और कीटनाशक तैयार कर फसल में लगने वाले कीटो से बिना जहरीले कीटनाशको का प्रयोग कर फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है। रसायन किस प्रकार मिट्टी, फसल, जल, वायु और हमारे शरिर पर अपना दुष्प्रभाव डालते है इसके बारे में बताया। राजयोग के माध्यम से कैसे हम अपने शुद्ध श्रेष्ठ संकल्पो का प्रयोग कर सात्विक अन्न का उत्पादन कर सकते है।
ग्राम अरकार से आए हुए श्री संजय चैधरी जी ने अपने कृषक जीवन के अनुभव बांटते हुए कहा कि मैने देश विदेश के कई किसानो और कृषि वैज्ञानिको से मिलकर कृषि के नए नए तरिके और कृषि क्षेत्र में होने वाले बदलाव के बारे में जाना है सभी ने यही कहा है कि रसायन और कीटनाशको का प्रयोग किए बिना भी अच्छा लाभदायक उत्पादन किया जा सकता है। मै स्वंय बिगत अनेक वर्षो से जैविक कृषि करके देश के अनेक स्थानो पर अच्छे मुनाफे के साथ फायदा प्राप्त कर रहा हूॅ। यदि हमें आने वाले समय के साथ चलना है तो इन जहरीले उत्पादो का प्रयोगा बंद कर ही होगा क्यों कि धरती है तो हम है।
इस अवसर पर गुरूर, मगरलोड, कुरूद, भखारा, नगरी, और धमतरी से करीब 200 किसान आए हुए थे सभी को पौधा वितरण कर शाश्वत जैविक कृषि के लिए प्रेरित किया गया।